यौन संचारित रोग (STD): कैसे फैलते हैं और बचाव के उपाय
यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases/ Infections) वे संक्रमण हैं जो मुख्यतः यौन संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। इनमें एचआईवी (HIV), सिफिलिस, गोनोरिया, क्लैमाइडिया, जननांग हरपीज़, और HPV शामिल हैं। कई मामलों में शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं या बिल्कुल नहीं दिखते—इसलिए **स्क्रीनिंग और प्रिवेंशन** बेहद ज़रूरी है।
STD कैसे फैलते हैं?
1) असुरक्षित यौन संबंध: बिना कंडोम के योनि, गुदा या मुख मैथुन के दौरान वायरस/बैक्टीरिया का आदान-प्रदान। सूक्ष्म कट/घाव से भी संक्रमण संभव।
2) रक्त/सुई के माध्यम से: साझा सुई/सीरिंज, असुरक्षित टैटू/पियर्सिंग, दूषित रक्त आधान।
3) माँ से बच्चे में: गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान (HIV, सिफिलिस, हेपेटाइटिस-B आदि)।
4) त्वचा-से-त्वचा संपर्क: HPV/हरपीज़ जैसे कुछ संक्रमण केवल त्वचा संपर्क से भी फैल सकते हैं—भले ही संभोग न हुआ हो।
STD के सामान्य लक्षण
- जननांग क्षेत्र में घाव/छाले/खुजली/लाल चकत्ते
- पेशाब के समय जलन/दर्द, असामान्य स्राव (दुर्गंध/रंग परिवर्तन)
- संभोग के दौरान दर्द या रक्तस्राव
- बुखार, थकान, ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में सूजन; HIV में बार-बार संक्रमण
ध्यान दें: कई STD बिना लक्षण भी होते हैं। लक्षण न हो तब भी संक्रमण फैल सकता है—इसीलिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है।
किसे अधिक जोखिम है? (Risk Factors)
- बार-बार असुरक्षित यौन संबंध या एक से अधिक साथी
- हाल में नया यौन साथी; पार्टनर का STD इतिहास अज्ञात
- इंजेक्शन ड्रग उपयोग/सुई साझा करना; असुरक्षित टैटू/पियर्सिंग
- HPV/हेप-B का टीकाकरण न होना
STD से बचाव के प्रभावी उपाय
1) हर बार सुरक्षित संबंध
लेटेक्स/पॉलीयूरीथेन कंडोम का सही उपयोग करें। नया कंडोम, सही साइज, एक्सपायरी चेक, और शुरुआत से अंत तक पहनें। तेल-आधारित लुब्रिकेंट लेटेक्स को कमजोर कर सकते हैं—पानी/सिलिकॉन-आधारित लुब्रिकेंट बेहतर हैं।
2) नियमित जांच (Screening)
सक्रिय यौन जीवन वाले वयस्कों को समय-समय पर HIV, सिफिलिस, गोनोरिया, क्लैमाइडिया की जांच करानी चाहिए—विशेषकर नए/एकाधिक पार्टनर हों तो। बिना लक्षण के भी जांच कराना फायदेमंद है।
3) टीकाकरण
HPV वैक्सीन (किशोर/युवा आयु में सर्वोत्तम) और हेपेटाइटिस-B वैक्सीन उपलब्ध हैं जो संबंधित संक्रमण/जटिलताओं (जैसे गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, लिवर रोग) का खतरा घटाते हैं।
4) सुई और उपकरण की सुरक्षा
इंजेक्शन/IV दवाओं, टैटू/पियर्सिंग के लिए केवल स्टरलाइज्ड, नई सुई और स्वच्छ उपकरण का उपयोग करें।
5) संचार और शिक्षा
पार्टनर से खुलकर बात करें, सीमाएं तय करें, और सहमति (consent) का सम्मान करें। युवाओं के लिए वैज्ञानिक, पक्षपातरहित यौन शिक्षा दीर्घकालीन सुरक्षा देती है।
STD का उपचार: क्या उम्मीद करें?
बैक्टीरियल संक्रमण (क्लैमाइडिया, गोनोरिया, सिफिलिस) आमतौर पर एंटीबायोटिक से ठीक होते हैं—डोज पूरा करना आवश्यक है। वायरल संक्रमण (HIV, जननांग हरपीज़, HPV) का पूर्ण इलाज नहीं, पर एआरटी/एंटिवायरल से नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताएँ कम होती हैं।
स्व-दवा से बचें: गलत/अधूरा इलाज एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस और जटिलताओं का जोखिम बढ़ाता है। हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह लें।
पार्टनर को सूचना और फॉलो-अप
यदि किसी STD की पुष्टि होती है, तो पिछले/वर्तमान पार्टनर को सूचित करें ताकि वे भी जांच/इलाज करा सकें। उपचार पूरा होने तक यौन संबंध न रखें या कंडोम का निरंतर उपयोग करें।
मिथक बनाम तथ्य
मिथक: लक्षण नहीं हैं तो संक्रमण नहीं है।
तथ्य: कई STD asymptomatic रहते हैं और फिर भी फैलते हैं।
मिथक: केवल “खराब” आदत वाले लोगों को STD होता है।
तथ्य: पर्याप्त सुरक्षा न बरती जाए तो किसी को भी हो सकता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
- नए घाव/छाले/खुजली, असामान्य स्राव, पेशाब में जलन
- संक्रमित पार्टनर के संपर्क में आए हों
- अनचाही गर्भावस्था की आशंका या HIV एक्सपोज़र (PEP परामर्श 72 घंटे के भीतर)
त्वरित चेकलिस्ट (Do/Don’t)
- Do: हर बार कंडोम, नियमित स्क्रीनिंग, टीकाकरण, पार्टनर से स्पष्ट बातचीत
- Don’t: साझा सुई, अधूरा इलाज, लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना
निष्कर्ष
STD गंभीर लेकिन रोके जा सकने वाले संक्रमण हैं। सुरक्षित यौन व्यवहार, नियमित जांच, टीकाकरण और सही उपचार से आप स्वयं तथा अपने पार्टनर को दीर्घकाल तक सुरक्षित रख सकते हैं। थोड़ी-सी सावधानी आपके स्वास्थ्य और संबंध—दोनों की रक्षा करती है।
Sources
- World Health Organization – Sexually Transmitted Infections (STIs)
- भारत सरकार – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (DGHS/Family Welfare)
- CDC – STDs: Prevention, Testing & Treatment